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 गुरु
September 5, 2020 • Havlesh Kumar Patel • poem
डॉ अवधेश कुमार "अवध", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 
गुरु से गणना गुरु से गिनती,
         गुरु से रस छंद समास सभी।
गुरु से रसआयन भौतिक भी,
     गुरु शिक्षक शीर्ष समाज सभी।।
गुरु नैतिक अर्थ सुपथ्य कला,
      सुर काव्य खगोल पुराण सभी।
गुरु ईश्वर हैं अरु ईश गुरू,
      गुरु से गण ज्ञान विधान सभी।।
 
गुरु के पग में सुख धाम रहे,
           सब लोग कहें यह पावन है।
हम नेक बने तज टेक सभी,
           गुरु ज्ञान सखे मनभावन है।।
शुभ लग्न भयो गुरु आन मिले,
          यह काल सुकाल कहावन है।
गुरु साथ मिला,मन फूल खिला, 
          हिय ज्ञान प्रकाश सुहावन है।।
 
गुरु से नभ है गुरु से वसुधा,
            गुरु से यह सूरज चाँद रहे।
गुरु से गिरि हैं गुरु से सरिता,
          गुरु से सचराचर ज्ञान बहे।।
गुरु रूठ गये जग सून भयो,
        हरि छोड़त हाथ अनाथ कहे।
अवधेश सनेह मिले गुरु तो,
        भगवान हुलासहिं गोद गहे।।
 
मैक्स सीमेंट, ईस्ट जयन्तिया हिल्स मेघालय