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आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत सभी लाभार्थियों का होगा डिजिटलीकरण, जन सेवा केन्द्रों  को सौंपी गई जिम्मेदारी
July 6, 2020 • Havlesh Kumar Patel • Muzaffarnagar
शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। सुपोषण और स्वास्थ्य पर शासन द्वारा इस समय विशेष जोर दिया जा रहा है । इसके लिए सुपोषण अभियान के साथ ही समय-समय पर विभिन्न प्रकार के जन जागरूकता अभियान व टीकाकरण सहित अन्य गतिविधियां भी संचालित की जा रहीं हैं। इसका प्रमुख उद्देश्य लोगों को सुपोषण के महत्व के प्रति जागरूक करना है। इस क्रम में अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत सभी लाभार्थियों का डिजिटल डाटा तैयार किया जा रहा है। इससे पंजीकृत लाभार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषाहार वितरण एवं टीकाकरण के दौरान नियमित मॉनिटरिंग कर उन्हें लाभान्वित करने में आसानी होगी।
जिला कार्यक्रम अधिकारी वाणी वर्मा ने बताया आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भवती व धात्री महिलाओं, छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों, तीन से छह वर्ष तक के बच्चों तथा विद्यालय न जाने वाली किशोरियों के संबंध में केंद्रों पर उपलब्ध डाटा को डिजिटल किया जा रहा है डिजिटलीकरण का जिम्मा जन सेवा केंद्रों को सौंपा किया गया है। केंद्र संचालक गांव में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर जाकर कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं से पंजीकृत लाभार्थियों का विवरण लेंगे। उन्होंने बताया शासन स्तर से प्राप्त निर्देशों के अनुसार प्रत्येक लाभार्थी की पहचान के लिए आधार कार्ड या राशन कार्ड का विवरण दर्ज किया जाएगा, साथ ही लाभार्थी के माता - पिता अथवा उसके परिवार के किसी भी सदस्य का मोबाइल नंबर भी दर्ज किया जाएगा।
डीपीओ ने कहा कि फीडिंग के बाद पूरा डाटा विभाग को देंगे, सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी(सीडीपीओ) लाभार्थियों के संपूर्ण विवरण का सत्यापन कर उन्हें जिला कार्यक्रम अधिकारी को उपलब्ध कराएंगे, इसके बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी|  उन्होंने बताया डिजिटलीकरण से लाभार्थियों और उनको मिलने वाली सेवाओं की आनलाइन निगरानी हो सकेगी। इसके साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ लोगों तक सही तरीके से पहुंच सकेगा।
उन्होंने बताया कि जनपद में सात माह से छह साल तक के कुल बच्चों की संख्या करीब 138021 के आस-पास है। गर्भवती व धात्री महिलाओं की संख्या  करीब54442  है जबकि स्कूल न जाने वाली 11 से 14 साल की किशोरियों की संख्या करीब 2218 हैं। इन सभी को2234 केंद्रों से पोषाहार का वितरण किया जाता है। अब यह सारा डाटा पोर्टल में फीड किया जाना है। इसके लिए लाभार्थी को आधार कार्ड, राशन कार्ड का नंबर देना होगा। अगर बच्चों के पास आधार नहीं हैं तो उनके परिवार का राशन कार्ड का नंबर लिया जाएगा। अगर यह दोनों नहीं हैं तो अभिभावक का भी राशन कार्ड या आधार का नंबर लिया जा सकता है।