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अपराधियो और नशे के आगोश में झारखंड सरकार
September 23, 2020 • Havlesh Kumar Patel • miscellaneous
आशुतोष, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 
नशा पतन है यह तब चरितार्थ होती है, जब आप झारखंड के गाँवों कस्वों में घूमते हैं। यहाँ  दम मारो दम में हर चौराहा मस्त है और प्रशासन गहरी नींद में? आखिर क्यों न हो यह फलता-फूलता नशा और अपराधीकरण झारखंड की पहचान बन गयी है।जिन बंदूको को रघुवर सरकार खामोश ने कर दी थी, वह अब चिघाड़ने लगी है। जिसका ताजा उदाहरण डाल्टेनगंज में ज्वेलरी दूकान में  दिन दहाड़े लूट है। आखिर चंद महीनो में  इतनी विकट परिस्थिति कैसे हो गयी।
दर असल गठजोड़ सरकार का अस्तित्व ही ऐसा है, जिसकी न कोई योजना है और न कोई मंजिल, न ही कोई नेतृत्व तो स्थिति ऐसी होनी ही थी। शाम होते ही भय का आगोश और बेदम होते लोग आखिर काम करने वाली सरकार को हटाने का नतीजा है, जो अब सामने लूट, हत्या और बलात्कार के रूप में किस्त में दी जा रही है।
नशा कारोबार का एक फलता-फूलता सेफ जहाँ झारखंड बन गया है, जो हेमन्त सरकार के आगोश में है। क्या सरकार इतना दम दिखा पाएगी कि इन पर कार्रवाई हो? घर-घर बिकती दारू, गाजा और चरस यहाँ की सस्कृति बन गयी है। चौक पर जुआ खेलते मनचले राह चलते महिलाओं पर फब्तियां कसते नजर आते हैं। आखिर कैसे इतनी तेजी से अपराधीकरण बढ़ा। पिछली सरकार ने जहाँ बिजली, पानी, सड़क, पुल, पुलिया, आवास, शौचालय का निर्माण कर झारखंड को उच्च कोटि का राज्य बनाया। नक्सल और अपराधो पर अंकुश लगाया और बड़े-बड़े अपराधी सूरमा या तो जमीदोज हो गए या राज्य छोड भाग गये, लेकिन सरकार बदलते ही पुनः एक बार सर उठाने लगे है यह अब नजर आने लगी है।
हालाकि इस स्थिति की जनता खुद जिम्मेदार है, जो राष्ट्रीय पार्टी को छोड़ गठबंधन सरकार चुनी है। इसका परिणाम उन्हें भुगतना ही होगा। झारखंड में नशे का कारोबार रोकना, अपराध जगत पर एक संपूर्ण कार्रवाई हो सकती है, जिसके लिए सरकार को हिम्मत दिखानीं होंगी।
 
                                पटना, बिहार