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भविष्य में वरदान साबित हो सकते हैं, वर्तमान में कोरोना के कारण लिये गये प्रीकाॅशन
July 8, 2020 • Havlesh Kumar Patel • National


हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

कोरोना वायरस जब पूरे विश्व में कोहराम मचाये हुए है और लाख कोशिशों के बावजूद इसका कोई तोड़ अभी तक नहीं निकल पाया है, ऐसे में यह बात दिल को सुकून पहुंचाने वाली है कि कोरोना के कारण बदली दिनचर्या और व्यवहार से लोग कोरोना को तो मात दे ही रहे हैं, भविष्य में भी कई खतरनाक बीमारियों से बचने का इंतजाम अंजाने में ही कर रहे हैं। 


नगर के एक चिकित्सक डा.शशिकांत वर्मा की मानें तो कोरोना वायरस के चलते लोगों की बदली दिनचर्या ने जहां अनेकों समस्याओं को जन्म दिया है और जीवन को थोड़ा कठिन कर दिया है, वहीं यह तथ्य सुकून भरा है कि इस दौरान लोगों द्वारा लिए जा रहे प्रीकाॅशन से अंजाने में ही कई बीमारियों में आश्चर्यजनक रूप से कमी आयी है। डा.वर्मा कहते हैं कि भारतवासियों का इम्यून सिस्टम अन्य की अपेक्षा थोडा मजबूत है, इसलिए देश में कोरोना पीड़ितों की संख्या तो काफी अधिक है, लेकिन इससे होने वाली मौत की दर काफी कम है। इसके साथ यह भी सुकून भरा है कि आने वाले दिनों में आज लिया गया प्रीकाॅशन हमारे इम्यून सिस्टम को इतना मजबूत कर देगा कि भविष्य में कई बीमारियों का खतरा सिरे ही टल जायेगा। डा.वर्मा अपने नीजि अनुभव के आधार पर बताते हैं कि कोरोना वायरस का प्रकोप उन्हीं शहरों या क्षेत्र में अधिक देखने को मिला है, जहां लोगों के खानपान का तरीका भारतीय संस्कृति से थोडा भिन्न है और अधिकतर प्रोसेस्ड फूड़ का प्रयोग करते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि मुम्बई, दिल्ली और आगरा आदि में कोरोना वायरस ने अधिक कोहराम मचाया है। इसका कारण वहां रहने वाले लोगों का खानपान ही है। वे बताते हैं कि इन शहरों में अधिकतर विदेशी लोगों का आना-जाना लगा रहता है और व स्वभावतः प्रोसेस्ड फूड़ का प्रयोग करते हैं, इसकी देखा-देखी वहां रहने वाले भारतीय भी इसी रंग में रंगते जा रहे हैं और पिज्जा, बर्गर, ब्रेड़ आदि खाने में ही अपनी शान समझने लगे हैं। इसी के चलते उनकी इम्यूनिटी मे आश्यचर्यजनक कमी आयी है, जिसके चलते वे आसानी से कोरोना की जद में आ रहे हैं। 


जानकार मनोज भाटिया बताते हैं कि यह कोरोना वायरस के चलते फेसमास्क का प्रयोग व धूम्रपान से परहेज का ही नतीजा है कि वर्तमान में कोरोना वायरस के बढ़ते खतरों के बीच टीबी, दमा आदि श्वांस रोगों में काफी कमी देखने को मिल रही है। उनका मानना है कि इस दौरान लोग आश्चर्यजनक रूप से प्रकृति के नजदीक आये हैं, जिसके दूरगामी परिणाम निश्चित रूप से सुखद होंगे। दूसरे शब्दों में कोरोना वायरस वर्तमान तो कहर बनकर लोगों पर टूट रहा है, लेकिन इसके कारण बदली लोगों की दिनचर्या भविष्य में निश्चित रूप से वरदान साबित होगी।

वरिष्ठ पत्रकार खतौली, जनपद मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश