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चलो अयोध्या धाम
August 4, 2020 • Havlesh Kumar Patel • poem
डॉ अवधेश कुमार 'अवध', शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 
चलो अयोध्या धाम,
विराजेंगे अपने श्रीराम।
 
कभी  राम झुठलाये जाते।
नकली चरित बताये जाते।
आतंकी बाबर के सम्मुख-
मनगढ़ंत  कहलाये   जाते।।
कैसी भी हो रात, 
किन्तु होती है सुबह ललाम।
 
वंशज   बहुधा जीते - हारे।
अनुयायी  के   वारे - न्यारे।
रक्तपात  के छद्म खेल में -
रामभक्त तन मन धन वारे।।
हुआ बहुत बलिदान, 
साक्ष्य है पावन सरयू धाम।
 
राम  अदालत  में  भी   आए।
साक्ष्य - साक्षी  भी  थे   लाए।
अधिवक्ता बन सच दिखलाए।
न्यायमूर्ति - उर  स्वयं समाए।।
जय जय जय श्रीराम, 
अवधपति अवध नयन अभिराम।
 
मैक्स सीमेंट, ईस्ट जयन्तिया हिल्स
मेघालय