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दोनों गुट में सुलह कराये बिना कूर्मि समाज की मजबूती मुश्किल
September 21, 2020 • Havlesh Kumar Patel • social
कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 
कूर्मि समाज के सम्मानित सदस्यों!        
मेरे द्वारा अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के दोनों गुट को एकीकरण करने की कोशिश करीब दो वर्ष पहले से की जा रही है। इसके पहले देश कुछ जागरुक और प्रबुद्ध वरिष्ठ मित्रों ने मध्य प्रदेश, दिल्ली और मुम्बई में महासभा के दोनों गुट को एकीकरण करने की कोशिश की पर सफलता नहीं मिली। मेरे द्वारा महासभा के दोनों गुट को एकीकरण करने की लगातार कोशिश करने पर एलपी पटेल के समर्थक चौधरी राजेश मोहन, चौधरी ब्रजेश मोहन,बिरेन्द्र साव पटेल (सागर, मध्य प्रदेश), शेखर, धवेन्द्र गंगवार, अजयवीर गंगवार, प्रशान्त पटेल जैसे लोगों ने खासकर चौधरी राजेश मोहन, चौधरी ब्रजेश मोहन ने खुद भी और रणधीर पटेल से हमें और हमारे टीम के अजय कुर्मी ( हरदा मध्य प्रदेश) मनोज कुर्मी (इंदौर), धीरू सचान (छतरपुर, मध्य प्रदेश) अटल बिहारी पटेल ( बांदा, यूपी) को फेसबुक और वाट्टसप्प ग्रुप में गंदी-गंदी गालियाँ दी है। हमने हमारे राष्ट्रीय समता महासंघ में (जहाँ खुद ही महासभा के दोनों गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव व अन्य राष्ट्रीय प्रमुख पदाधिकारी मौजूद ऐड रहें हैं) और एलपी पटेल, वीएस निरंजन, डाॅ मंगेश देशमुख, ब्रिडेगियर सुधीर सावंत समेत एलपी पटेल के अन्य सभी प्रमुख पदाधिकारी को एलपी पटेल के समर्थक चौधरी राजेश मोहन, चौधरी ब्रजेश मोहन और रणधीर पटेल द्वारा दिये गये सोशल मीडिया पर गंदी गंदी गालियाँ प्रमाण सहित भेजकर उचित कार्रवाई करने के लिए सूचना दी गई, पर एलपी पटेल और उनके गुट के अन्य किसी व्यक्ति ने कोई नोटिस नहीं लिया। 
यही हाल दूसरे गुट सर्वेश कटियार का है। दिसम्बर 2919 से जुलाई 2020 के बीच कुछ असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक फैसले लेने के कारण जब हमने दूसरे गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वेश कटियार व्यक्तिगत रूप और और महासभा के राष्ट्रीय कोर कमिटी में टोका तो वे नाराज हो गये और उसके बाद आम सभा द्वारा चुने गये महासभा के राष्ट्रीय महासचिव आरएस कनौजिया को अपमानित करने के उद्देश्य से बर्खास्त किये जाने के पत्र सोशल मीडिया पर जारी कर दिये। साथ ही मेरे खिलाफ अपने कानपुर के समर्थक-रिश्तेदार प्रदीप कुमार कटियार से सोशल मीडिया पर अपमानजनक अशोभनीय टिप्पणी करवा कर मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश की। इतना ही नहीं लगातार सर्वेश अपने कुछ समर्थक द्वारा महासभा के आम सभा द्वारा चुने गये राष्ट्रीय महासचिव आरएस कनौजिया के खिलाफ असंवैधानिक रूप से सोशल मीडिया पर अपमान जनक अशोभनीय टिप्पणी प्रसारित करवा रहे हैं। प्रमाण के साथ सूचित करने पर भी सर्वेश अपने उन गलत समर्थको को न तो नियंत्रित किया और ना उन पर कोई अनुशासनिक कार्रवाई की। उल्टा पक्षपात करके आमसभा द्वारा चुने गये राष्ट्रीय महासचिव आरएस कनौजिया को 9  जुलाई 2020 को पद से बर्खास्त किये जाने के पत्र सोशल मीडिया पर जारी कर दिये, जिसका अधिकार महासभा के बायलाॅज ने उन्हें नहीं, बल्कि आम सभा को दिया हुआ है। बात यहीं नहीं रूकी, अपने रिश्तेदार को महासभा का महासचिव नियुक्त कर दिया। उसके बाद लगातार श्री सर्वेश अपने रिश्तेदारों और रिश्तेदारों के समर्थकों महासभा के पदाधिकारी नियुक्त कर रहे हैं, जबकि हम (कौशल किशोर आर्य) और आरएस कनौजिया समेत अन्य मित्र देश के विभिन्न राज्यों में कूर्मि समाज के लोगों पर किये जा रहे विभिन्न अत्याचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर संबंधित नेता, जनप्रतिनिधि और सरकार के समक्ष बात रखकर अत्याचार पीड़ित कूर्मि परिवार को मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। 
       मेरे द्वारा अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के दोनों गुट को एकीकरण करने की कोशिश में एलपी पटेल के समर्थकों द्वारा गालियाँ दी गई, धमकियाँ दी गई, केस में फंसाने की धमकी तक दी गई हैं। एनके सिंह ने हमें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की कोशिश की है। महासभा के प्रथम गुट ठेकेदार व खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष कहने वाले एलपी पटेल के समर्थक सुलह करने के प्रस्ताव को लगातार खारिज करते हैं। 
      अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के दोनों गुटों के ठेकेदार व तथाकथित राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद को कूर्मि समाज और महासभा से उपर समझते हैं। ये दोनों गुटों के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने महासभा को 2008 से अपने निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिए महासभा को दो फाड़ करके कटुता फैला रहे हैं। यही कारण है कि कूर्मि दो गुटों में बंटकर एक-दूसरे को नीचा दिखाकर उन्हें नुकसान पहुंचा रहें हैं। वास्तव में इन दोनों महासभा के तथाकथित राष्ट्रीय अध्यक्ष का कोई लेना देना नहीं है, इन दोनों राष्ट्रीय अध्यक्ष को अपने पदों पर मरते दम तक बने रहना है। 2008 के हैदराबाद के राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी कनौजिया, राष्ट्रीय महासचिव नृसिंह अज्ञानी, जो लगातार ऐन केन प्रकारेन 16 वर्षों महासभा के राष्ट्रीय पदाधिकारी बने बैठे थे, उन्हें बदलने की कोशिश आरएस कनौजिया व अन्य मित्रों द्वारा हैदराबाद के राष्ट्रीय अधिवेशन में करते हुए एलपी पटेल को राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव आरएस कनौजिया बनाये गये पर जेपी कनौजिया, नृसिंह अज्ञानी, उमाशंकर कटियार ने नये पदाधिकारी को कार्यभार नहीं दिये और उमाशंकर कटियार के नेतृत्व में समानांतर महासभा बना दिया, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष उमाशंकर कटियार और राष्ट्रीय महासचिव नृसिंह अज्ञानी बनाये गये। सन 2011 तक उमाशंकर कटियार के आजीवन राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहने के बाद उनके बेटे सर्वेश कुमार कटियार ऐन-केन-प्रकारेन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गये और तब से लगातार अभी 2020 तक महासभा के दूसरे गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हुए हैं। एलपी पटेल महासभा के प्रथम गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष लगातार 2008 से अभी 2020 तक (14 वर्षों से) बने हुए हैं। इन दोनों गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आपस में गुप्त समझौता किया हुआ हैं कि मरते दम तक महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहना है और मरने के बाद इनके घर के वारिस को महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना है, ताकि ये दोनों गुटों के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने निजी स्वार्थ को पूरा करते रह सकें। इसीलिए कई बार कोशिश किये जाने पर भी ये दोनों गुटों के राष्ट्रीय अध्यक्ष महासभा को एकीकरण नहीं कर रहे हैं। जो पदाधिकारी एलपी पटेल के लिए काम करते हैं, वही पदाधिकारी सर्वेश कटियार गुट के पदाधिकारी सर्वेश द्वारा बना दिये जाते हैं। महासभा के दोनों गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष कांग्रेस व भाजपा के नेता-विधायक जैसे देश के कूर्मि समाज को बना डाला है। ये सारे खेल देश के जागरूक, प्रबुद्घ और बुद्धिजीवी कूर्मि समाज के मित्र देख समझ रहे हैं पर सभी मौन धारण किये हुए हैं, जिसका गलत फायदा महासभा के दोनों गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष 2008 से अब तक (14 वर्षों से) उठा रहे हैं। जिसका परिणाम आप देख ही रहें हैं। देश में राष्ट्रीय स्तर पर पर कूर्मि समाज की आबादी करीब 23 करोड़ है, पर हमारे समाज को आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा नहीं दिये जा रहे हैं। उसकी भी वजह यही है कि हमारे कूर्मि संगठनों के पदाधिकारी आपस में ही लड़ रहे हैं। 
       क्या आप नहीं चाहते सवर्ण जाति, पाटीदार समाज, मारवाडी समाज और सिन्धी समाज की तरह आपके 126 वर्ष पुराने और 1894 में स्थापित अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा विकसित और मजबूत बना रहे ताकि देश के अन्य कूर्मि संगठनों को भी आपस में सामन्जस्य बनाकर संगठित और मजबूत रखा जा सकें ताकि हमारे कूर्मि जाति पर देश में कहीं भी किसी जाति, वर्ग, नेता या सरकार द्वारा विभिन्न अत्याचार और अन्याय किये जाने पर हमलोग अपनी आवाज पूरे बुलंदी के साथ रखकर अपना हक और अधिकार ले सके? यदि हाँ, तो आपको सामने आना होगा और महासभा के दोनों गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष का एकीकरण कराकर किसी तीसरे ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ क्रांतिकारी व्यक्ति को महासभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना होगा। क्या महासभा के दोनों गुट को एकीकरण करने की कोशिश करके हमने कोई अपराध कर दिया? अगर महासभा के दोनों गुट को एकीकरण करने के कोशिश करने पर हमारे ही कूर्मि समाज के लोग हम जैसे लोगों को अपमानित करने की कोशिश करेंगे तो कैसे महासभा या अन्य कूर्मि संगठनों या कूर्मि समाज का सर्वागीण विकास कैसे होगा? क्या इस गम्भीर विषय पर आप देश के सभी कूर्मि मित्रों को विचार नहीं करना चाहिए? क्या गौरवशाली कूर्मि कुल में जन्म लेने से आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है? क्या आपको अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के दोनों गुट को एकीकरण करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए? क्या आप नहीं चाहते हैं कि देश में पंचायत से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कूर्मि समाज का सर्वागीण विकास किये जा सकें? यदि हाँ तो आईए! कुछ क्रांतिकारी आवश्यक बदलाव करने में साथ दीजिए। 
 
संस्थापक राष्ट्रीय समता महासंघ व राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा