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दृष्टि बाधित दिव्यांग छात्रा माधुरी पटेल बनी हाईस्कूल परीक्षा में प्रेरणास्रोत, 600 में से प्राप्त किये 523 अंक
July 11, 2020 • Havlesh Kumar Patel • education
प्रभाकर सिंह, प्रयागराज। खुद को कर बुलंद इतना खुदा खुद आकर पूछे बता तेरी रजा क्या है ? जी हां इस वाक्य को बखूबी चरिर्ताथ किया है ग्राम- आधार का पुरा, पोस्ट घोड़ीडीह, तहसील- करछना, जनपद- इलाहाबाद (प्रयाग) के (पिता स्व० राममणि पटेल, माता श्रीमती- शैलकुमारी पटेल ) की बेटी माधुरी पटेल ने। अभी आप तमाम हाईस्कूल व इंटरमीडियट कक्षा के मेघावी छात्र-छात्राओं के नाम अखबार, टीवी, रेडियो के माध्यम से पढ़, सुन, देख रहे होगें। लेकिन जिस मेघावी की बात हम करने जा रहे है शायद ही आप ने उस मेघा के विषय में पढ़ा, सुना, देखा हो लेकिन आप को बता दे की सूबे की दृष्टि बाधित दिव्यांग बालिका माधुरी पटेल ने भी प्रदेश के सकलांग व दृष्टि बाधित दिव्यांग छात्राओं मे हाईस्कूल में 87.16 % अंक प्राप्त कर न केवल अपना परचम लहराया है अपितु सकलांग एवं दिव्यांग छात्र – छात्राओं, समाज, दिव्यांगजनों के परिवार हेतु प्रेरणास्रोत भी बनी है। माधुरी पटेल उत्तर प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा लखनऊ मे संचालित राजकीय दृष्टि बाधित दिव्यांग बालिकाओं के कालेज में इस वर्ष हाईस्कूल की छात्रा थी। जन्म से शत प्रतिशत दृष्टि बाधित दिव्यांग छात्रा ने इस वर्ष यूपी बोर्ड हाईस्कूल परीक्षा में 523 / 600 अंक प्राप्त कर अपने मेघा का लोहा मनवाया है। माधुरी पटेल इस खुशी के मौके पर खुश है कि वर्ष भर लगन से पठन, अध्ययन का परिणाम सुखद रहा परन्तु दुसरें ही क्षण दुखी मन से बताती है कि काश मेरे पिता जी इस खुशी के मौके पर होते तो हमारी खुशी दोगुनी हो जाती। बचपन मे ही पिता के निधन के बाद माँ ने खेती व मेहनत कर मेरे दृष्टि बाधित दिव्यांग होने के बाद भी बड़े जतन, बगैर भेदभाव, पूर्वाग्रह के इलाहाबाद में स्थित राज अंध विद्यालय एक एन.जी.ओ. मे पढ़ाया। उसके बाद अप्रैल 2018 मे कक्षा-9 मे लखनऊ में प्रवेश लिया।
मेरे इस सफलता का श्रेय मेरे समस्त शिक्षक – शिक्षिकाओं, सहपाठियों को जाता है। जिन्होंने सदैव मेरा हौसला बढ़ाते हुए मार्गदर्शन, सहयोग प्रदान किया। मेरे इस उप्लब्धि में मेरे इलाहाबाद के पूर्व विद्यालय, शिक्षकों व मेरे भाई का भी अमूल्य योगदान है। वर्तमान में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के निदेशक श्री अजीत कुमार जो स्वयं शत प्रतिशत दिव्यांग होकर भी देश के प्रतिष्ठित सर्विस – आई.ए.एस. है मेरे प्रेरणास्रोत है। मै भी आगे चलकर एक ईमानदार आई.ए.एस. अधिकारी बनाना चाहती हूँ। जिससे मै समाज को अपनी सेवाओं को दे सकूं। अपनी सफलता के गुरूमंत्र के रूप में वर्ष पर्यन्त 6 घंटे स्वाध्याय से अध्ययन, नियमित कक्षा अध्ययन, शिक्षक – शिक्षिकाओं से मार्गदर्शन बताया। माधुरी पटेल को पढ़ना, रेडियो सुनना, सहपाठियों से बात करना पसंद है। माधुरी पटेल के शिक्षक आलोक कुमार सिंह बताते है कि कालेज मे छात्रा के अन्दर पढ़ाई के प्रति जबरजस्त लगन है। कक्षा में भी वह बराबर प्रश्न करती रहती है। एक जागरूक विद्यार्थी के रूप मे बहुत ही कम समय मे अपनी पहचान स्थापित की है। माधुरी पटेल ने 3 दिसम्बर विश्व दिव्यांग दिवस व 4 जनवरी ब्रेल लिपि अविष्कार लुईस ब्रेल के जन्मदिन पर सी.आर.सी. लखनऊ, भारत सरकार द्वारा आयोजित ब्रेल लेखन प्रतियोगिता में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया था फलस्वरूप कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अजीत कुमार (आई.ए.एस.) निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ने पुरस्कृत व सम्मानित किया था।