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हमने अपने-पराये देखे
September 3, 2020 • Havlesh Kumar Patel • poem


मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

हमने अपने-पराये देखे
ख्वाब बड़े-बड़े सुहाने देखे

गम का सागर देखा
खुशियों का पिटारा देखा

धूप-छाँव का खेल निराला देखा
अपनों का अपनों पर सितम भी देखा

हमने अपने-पराये देखे
ख्वाब बड़े-बड़े सुहाने देखे

चाहने वालों को भी नफरत करते देखा
हमने जमाने को पल-पल रंग बदलते देखा

निराशाओं में आशा को पलते देखा
हमने सूखे चेहरों को हंसते-मुस्काते देखा

हमने अपने-पराये देखे
ख्वाब बड़े-बड़े सुहाने देखे

सुविधाओं को घुट-घुट मरते देखा
असुविधाओं को पलते-बढ़ते देखा

हमने जग को नजदीक से देखा
संसार को संसार की नजर से देखा |

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा