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हिमाचल प्रदेश के चुराग में 70 वर्ष पूर्व लगाए थे सेब के पौधे
July 13, 2020 • Havlesh Kumar Patel • Himachal
राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 
हिमाचल प्रदेश के करसोग उप-मंडल में सभी प्रकार की फल-उत्पादन जलवायु परिस्थितियां उपलब्ध है, जिनमें  विभिन्न प्रकार फल सफलता पूर्वक उगाये जा सकते हैं, लेकिन करसोग-पांगणा क्षेत्र में सेब के सबसे अधिक बागीचे हैं तथा दूसरे फलों के बागीचे उपेक्षाकृत कम ही हैं। मंडी जिला में करसोग उप-मंडल सबसे अधिक सेब पैदा करता है।
डा.जगदीश शर्मा का कहना है कि करसोग में सेब का सबसे पहला बागीचा चुराग के चमनपुर में पंडित गंगा राम ने 1950 में लगाया था। अमेरिका के बागबानी विभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर सेवारत गंगा राम के बेटे धर्म प्रकाश शर्मा ने करसोग के इसी बागीचे में टिशू कल्चर से सेब की अच्छी किस्म के पौधे तैयार करने और अर्ली किस्मों के सेब पौधों की शुरुआत की।
बागवानों की सहभागिता 
आज प्रदेश सरकार द्वारा बागबानो को नई-नई किस्मों के सेब के पौधे उपलब्ध करवाए जा रहे है। बागबानो को बागीचा लगाने, दवाइयों, ओलों से बचाव के लिए जालियां, मिट्टी-पत्तियों की जांच, स्प्रे पंप, सिंचाई टैंक, टपक सिंचाई, प्रूनिंग कैंची, सीढ़ी, पावर ट्रीलर, केंचुआ खाद निर्माण जैसी अनेक सुविधाओं में सबसिडी प्रदान की जा रही हैं। झाबर सिंह ठाकुर का कहना है कि 1979 में सेब की ग्रेडिंग, पैकिंग, विपणन, विधायन के लिए पांगणा-करसोग मार्ग पर स्थित चारकुफरी में एचपीएमसी केंद्र की स्थापना हुई। इस केंद्र में आज खाद, स्प्रे आयल, पेस्ट, स्प्रे की दवाइयां, सेब के खाली बाक्स (कार्टन), पैकिंग ट्रे, स्प्रेटर, किल्टे, टोकरे, क्रेट सहित अन्य पैकिंग सामग्री के साथ जहां निर्धारित  सरकारी मूल्य पर सेब खरीदने की सुविधा उपलब्ध है, वहीं रियायती दर पर विभिन्न फूलों-फलों के जूस, जैम, आचार आदि बागबानो को उपलब्ध करवाया जाता है। सरकारी सुविधाओं के कारण हर परिवार मे सेब बागबानी का शौक लगातार बढ़ता जा रहा है। बागबान डा.जगदीश शर्मा और बागबान सुमीत गुप्ता ने बताया कि इस बार सेब की फसल कम है। प्रथम लौकडान के दौरान कर्फ्यू आदि प्रतिबंधों के कारण पिंक बड की संवेदनशील अवस्था में आवश्यक छिड़काव न कर पाने से घर से दूर-पार स्थित बागीचों वाले बागबानो को आज सैटिंग न हो पाने के कारण जहां नुकसान व हानि उठानी पड़ी है, वहीं जहां सेब की फसल ठीक है, वहां जुलाई से सितंबर माह तक चलने वाले सेब सीजन के लिए बागबानो ने कोरोना के संकट से उत्पन्न चुन्नौतियों और दिक्कतों साथ जुझते हुए अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए कमर कस ली है।
करसोग तहसील और पांगणा उप-तहसील के निचले तथा मध्यावर्ती क्षेत्रों के सेब के बागीचों में टाईडमैन के तुड़ान के बाद नई किस्मों जैरो, माईन, रैडवोलैक्स, स्कारलैट-2, सुपर चीफ, गाला, अर्ली रायल आदि का तुड़ान शुरू हो गया है। द करसोग ट्रक को ओप्रेटिव सोसायटी बखरौट के सदस्य हेमराज गुप्ता ने बताया कि टाईडमैन सेब के 26 ट्रक दिल्ली तथा एक कंटेनर उड़ीसा गया है। लगभग इतनी ही छोटी गाड़ियां शिमला-सोलन-परवाणु-चंडीगढ़ सेब लेकर गई होंगी।
हिमाचल प्रदेश बागबानी निदेशालय शिमला में कार्यरत डा.शरद गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष फसल कम पैदा हुई है, लेकिन फिर भी कोरोना के चलते सरकार द्वारा सेब के भंडारण की उचित व्यवस्था की गई है। कोरोना की वजह से कोई व्यवधान न हो, इसके लिए सरकार ने उपयुक्त इंतेज़ाम किये गए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष असामयिक पतझड़ और स्कैब जैसे रोगों के प्रति बागवानों को विशेष रूप से सजग रहने की आवश्यकता है।
संस्कृति संरक्षक, आनी (कुल्लू) हिमाचल प्रदेश