ALL social education poem OLD miscellaneous Muzaffarnagar UP National interview Himachal
जाग जाओ, वरना बहुत देर हो जाएंगी
July 21, 2020 • Havlesh Kumar Patel • social

अंशुमान सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

कुछ तथाकथित सामन्तवादी विचारधारा के लोग कहते हैं कि obc, sc, st आरक्षण लेता है और जनरल को जातिगत टिप्पणी करता है। उनका कहना है कि जो भी वर्ण जाति पर सवाल करें, उनके लिए सरकार कानून बनाये और ऐसे लोगों को जेल भेजा जाए। मैं उन सभी सामंतवादी विचारधारा के लोगों को बताना चाहता हूँ कि आपको दिक्कत संविधान से है, मनुस्मृति से नहीं। आप सीधे-सीधे यह बोलिये कि फिर से मनुस्मृति का दण्ड विधान लागू हो जाये, क्योंकि आपको शायद भारत देश के संविधान में विश्वास नहीं, जितना मनुस्मृति में है।

वर्ण जाति उपजाति का कुचक्र किसने रचा, आप पहले वर्ण जाति खत्म कर दीजिए आरक्षण अपने आप समाप्त हो जायेगा आरक्षण का प्रावधान प्रतिनिधित्व के लिए लाया गया है, ताकि हर धर्म जाति समाज का व्यक्ति बराबरी पूर्वक विकास करें और सम्मान पूर्वक जीवन जी सके, लेकिन आपको आरक्षण से सिर्फ इस लिए दिक्कत है, ताकि अब आप उसे गुलाम बनाकर अपना काम नहीं करा सकते क्योंकि संविधान ने उन्हें स्वतंत्रता का अधिकार जो दे दिया है। आजादी के पहले जब व्यक्ति गुलामी से जीवन जीते थे। पढ़ने-लिखने का अधिकार उनके पास नहीं था। महिलाओं को शिक्षा से दूर रखा जाता था। वर्ण व्यवस्था जाति उपजाति के शोषण से पीड़ित बेबस थे, जो सदियों से समंतियों द्वारा सताए जाते हैं, जो आज भी गाँव, कस्बा, शहर में मजदूरी काम-धंधा करके अपनी रोजी रोटी चला रहें हैं, वे अब स्वतंत्र हैं। ऐसे समाज के लोगों के साथ, जिसके ऊपर केवल एक समाज उनको सदियों से ठगता रहा, गुलाम बनाकर रखा, उन्हीं शोषित समाज को ये आरक्षण का प्रावधान है, ताकि वो भी देश के विकास में अपनी भूमिका निभा सके। चाहे वो जिस रूप में, किसान मजदूर अधिकारी नेता आदि के प्रतिनिधित्व में। और वो भी शिक्षित होकर नमक रोटी खाकर कामों से जूझकर आरक्षण के प्रावधान से लाभ लेकर थोड़े कम नम्बर में भी वो नौकरी पाकर सरकारी व्यस्था में जाकर हर समाज को अपनी सेवा दे सकें और अपने समाज को जागरूक कर सकें।

आप लोग कब तक अपनी संकीर्ण पुरानी सोच में जीते रहेंगें, जिससे सिर्फ सभ्यता और संस्कृति को चोट पहुँचे। मेरा निवेदन उन सभी समाज के लोगों से है जो संविधान को मानते और जानते हैं।
●आप लोग कब तक सोतें रहेंगें, क्या फिर से कोई छलिया आपको छले ?
●क्या फिर से सामंती व्यवस्था, जाति वर्ण के कुचक्र को भारत में आने देंगें?
●सदियों से समंतियों के बनाये रास्ते पर चलते रहें। अरे अब कब तक और चलोगे, कब अपना रास्ता बनाना सीखोगें?
●जिनको आरक्षण से दिक्कत है, वो पहले जातिगत जनगणना करायें और देखें उन जातियों में अभी कितने % लोग अशिक्षित और बेरोजगार हैं और फिर जनरल जातियों के % निकाले कितने अशिक्षित और बेरोजगार हैं और इस आधार पर जो पीछे हो उसे आगे लाने की माँग क्यों नहीं करते। आप लोग कब तक हाथ पर हाथ रखकर बैठें रहोंगे ? आप क्यों नहीं माँग करते, कब तक ऐसे ही मूर्ख बनें रहोंगे? अब जाग जाओ सही समय है, वरना बहुत देर हो जाएंगी।