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कठपुतलियां
August 16, 2020 • Havlesh Kumar Patel • Himachal
प्रीति शर्मा "असीम", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 
 कठपुतलियां है जीवन के,
 रंगमंच की ।
 
जुड़ी है जिन धागों से ,
जो सभी के,
धागों को नचाता है ।
 
किसी को,
वो कठपुतली वाला ,
नजर नहीं आता है।
 
ढील देता है सबको ,
अपने-अपने किरदार में ,
परखता है हर इंसान को,
अपने दिए हुए संस्कार से ,
 
देखता रहता है सबको ,
उनके अदा किये किरदार में,
कैसे भटक रहे हैं ।
उलझे हैं किन ख्यालात में ।
 
भूल जाते है हम 
 
है.. किसके हाथ में ,
सोचते हैं............... बस 
हम ही है इस संसार में ,
 
सबको नचाते है। 
कभी पैसों से,
कभी ताकत के अंहकार से।
लेकिन.........
 
कब उसके हाथ के, 
धागे खींच जाते है।
 
जीवन के रंगमंच से, 
कितने किरदार निकलते ।
और कितने नए आ जाते है।
 
कठपुतलियां नाचती रह जाती है।
पर धागों से बंधी होकर भी, 
उस धागे वाले तक नहीं पहुंच पाती है।
 
प्रीति शर्मा "असीम", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।