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खुशी की दस्तक
July 5, 2020 • Havlesh Kumar Patel • Himachal
उमा ठाकुर,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 
आँगन में खूशबू 
महका करती थी जहाँ हर पल
तीज त्यौहार,देव कारज,
निभाती थी अम्मा आस्था
परंपरा के साथ 
सिमटा था जीवन दरख्त सा
खुला आसमां 
धार पर फिसलती धूप सा
मगर था अडिग 
हौसला पहाड़ सा
 और साथ था
यादों की सौगात का
जिसमें बह जाती 
 निर्झरणी सी वह यूंँ ही कभी
गंगी,झूरी,लामण गाते गाते
रोक लेती सैलाब भीतर गहरे
फिर जुट जाती गौ सेवा में,
काट लेती घाव कभी किसी 
दराटी की तेज़ धार से
लगा लेती फिर उस पर
सपनों का बाम l
 
इस आँगन में
अब पसरा विराना है
बचपन की यादों का,
बस बचा अनमोल खज़ाना है
बरसों बाद एक परी ने दस्तक दी
 बंद दरवाज़े पर खुशियों की
नन्हें कदमों की आहट ने 
महकाया घर आंगन सारा 
बोल ऊठी मौन दिवारें,
 कि आओ गले लगा दूँ तुम्हें 
छूट गया जो बचपन,
माँ का आँचल
 जी लूं  वो यादें 
जी भरकर दोबारा l
 
आयुष साहित्य सदन पंथाघाटी, शिमला