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कूर्मि जाति को सर्वागीण विकास के लिए बौद्धिक, मानसिक,वैचारिक रूप से जागरूक और मजबूत होना आवश्यक है
September 11, 2020 • Havlesh Kumar Patel • National
कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 
आज जो सभी राज्यों में कूर्मि जाति की दुर्दशा है इसके लिए खुद कूर्मि समाज के आम लोग, नेता, जनप्रतिनिधि, नौकरशाह जिम्मेदार हैं। सिर्फ जनरल और टेक्निशियम उच्च शिक्षा प्राप्त करने से व्यापक सामाजिक स्तर पर कुछ मनोवांछित सकारात्मक परिणाम नहीं मिलने वाला है। हाँ! निजी स्वार्थ और जरूरतें भले पूरी कर ली जाये पर इससे व्यापक स्तर पर समाज को कुछ हासिल नहीं होने वाला है। इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हमारे आपके सामने है ही। आये दिन देश के विभिन्न राज्यों में करीब 20-22 % (32 करोड़ आबादी वाली) कूर्मि जाति को कैसे विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता और सरकार नुकसान कर रहे हैं, यह हम सबके सामने है। हमारे इस नुकसान में अपने निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिए लगे हुए हमारे कूर्मि जाति के बहुसंख्य चाटुकार भी हैं, जो कूर्मि समाज के सर्वागीण विकास नहीं, सिर्फ अपना सर्वागीण विकास करने के लिए अपने जमीर तक को गिरवी रख चुके हैं। ऐसे लोगों से कूर्मि समाज को बचाने और उनका सर्वागीण विकास करने के लिए कूर्मि समाज को मानसिक, वैचारिक, बौद्धिक समझदार,परिपक्वव मजबूत होना होगा,जो कूर्मि समाज के लोगों में विकसित नहीं हो रहे हैं, जबकि सवर्ण जाति के लोगों में यह समझ कुट कुट कर भरे होते हैं। सवाल उठता है इसका कारण क्या है? कारण है वर्षों से बचपन से मिले हमारे संस्कार, हमारे घरेलू, सामाजिक परिवेश, रहन-सहन, खान-पान और विभिन्न अभाव तथा तकलीफ में जी गई जिंदगी है, जिसके कारण हमारे कूर्मि जाति के लोगों के विचार कुंठित और उनके मन में निजी स्वार्थी जगह बना लेते हैं। जो व्यक्ति, परिवार, जाति के लोग बौद्धिक, वैचारिक,मानसिक रूप से परिपक्व, मैच्योर, समझदार होते हैं, उनके खुद के साथ ही उनके घर-परिवार, समाज, जाति में आपस में अपार प्रेम, स्नेह, आपसी सहयोग, आपस में दुःख-सुख में भागीदारी रहती है। इसके विपरीत जिस व्यक्ति, घर-परिवार, समाज-जाति में उपर के सकारात्मक आवश्यक गुण नहीं होते, उस व्यक्ति, घर-परिवार, समाज -जाति का कभी भला नहीं हो सकता है। अगर इसके लिए किसी नेता, जनप्रतिनिधी को हम पूरा दोष दे तो यह सही नहीं होगा। हाँ! हमारे कूर्मि समाज के उन नेताओं-जनप्रतिनिधियों समेत समाज-देश के उन सभी लोगों की बहुत जिम्मेदारी बनती है, जो आर्थिक, शैक्षणिक, सामाजिक, बौद्धिक, मानसिक, वैचारिक और राजनैतिक रूप से जागरूक, समझदार और मजबूत होते हैं। अगर हमारे कूर्मि जाति के ऐसे मजबूत मित्र भी अपने समाज के सर्वागीण विकास और अधिकार के लिए कोशिश नहीं करते हैं, तो ऐसे में उनके समझदार, प्रतिष्ठित, सम्पन्न और मजबूत होने का कोई मतलब नहीं है। ऐसे लोग निश्चित रूप से समाज-जाति के प्रति अपनी जवाबदेही नहीं निभा रहें हैं, यह बिल्कुल ही गलत है। कूर्मि समाज के एकता में बाधक एक और प्रमुख समस्या है:- मध्यम भाग (मिडिल पार्ट) में फंसे रहना। कूर्मि जाति के मार्स, व्यापक स्तर पर अगर हम बात करे, उन पर गौर करें तो पता चलता है कि शिक्षा, प्रतिष्ठा, रहन-सहन, सामाजिक परिवेश, बौद्धिक, मानसिक, वैचारिक समझ समेत हर तरह के विकास के मामले में न बहुत आगे, न शिखर पर हैं और ना ही बहुत पीछे, यह कूर्मि समाज बीच में सदियों से अटका -लटका हुआ है। यही असाध्य बीमारी कूर्मि समाज के विकास और एकता में बालक है, जिसे पूरी तरह दूर किये बिना किसी भी तरह के सामाजिक राजनैतिक एकता और सकारात्मक परिवर्तन  नहीं किये जा सकते हैं। सवाल उठता है आखिर इस आसाध्य बिमारी का इलाज क्या है? इसका इलाज बहुत सुलभ और आसान है, पर कूर्मि समाज के लोगों के गले में जल्दी नहीं उतर रही है। इसका इलाज है सवर्ण जाति, सिंधी जाति, मारवाडी जाति, गुजरात के पाटीदार जाति की नकल। मतलब जैसे सवर्ण जाति के लोग अपनी जाति के लोगों को आगे बढा़ने के लिए आँख बंद करके समर्थन और पूरा हर तरह से, तन, मन और धन से सहयोग करते हैं, वही नकल हमें भी अपने हर कूर्मि मित्रों के लिए बिना किसी उम्मीद,चाह, स्वार्थ की आशा किये करना होगा। हमें अपनी हर आवश्यक जरूरत को पूरा करने के लिए या कुछ खरीद-बिक्री करने के लिए कूर्मि मित्रों के डाॅक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, शिक्षक, कोचिंग सेंटर, साइंटिस्ट, दूकानदार से ही सर्वप्रथम कोशिश करके, जानकारी प्राप्त करके सम्पर्क करना चाहिए। फिर देखिये कैसे सकारात्मक परिणाम सामने आता है। पाटीदार, सिंधी, मारवाडी जाति बहुत ज्यादा उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं करते हैं, पर उनमें आपस में एक दूसरे को हर तरह से मदद करने की बौद्धिक और वैचारिक समझ बहुत विकसित रहती है, यही कारण है कि यह जातियाँ विकास, मजबूती और एकता के मामले में हमसे बहुत आगे हैं। 
      जिस दिन हमारे कूर्मि जाति के लोग ऐसा कर लेंगे, उसी दिन हमारे कूर्मि जाति के विकास की शुरुआत की निंब पड़ जाएगी और तब हम हमारे समाज के और अन्य समाज के बेईमान और गद्दार किस्म के नेताओं को भी चुटकी में सबक सिखा पाएंगे। इसीलिए हे गौरवशाली जाति के कूर्मि कुल गौरव! हे कूर्मि जाति के तारनहार! आईए! हमलोग अपने अंदर आज से, अभी से इन गुणों को विकसित करें, इन गुणों का अपने अंदर समावेश करें और अपने निजी जीवन के साथ साथ कूर्मि समाज के सभी मित्रों के जीवन को सफल करने के लिए सामाजिक -सार्वजनिक स्तर पर नव निर्माण की शुरुआत करें। आप जहाँ कहीं भी हो अपने कूर्मि समाज के ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ,समतावादी,निष्पक्ष मित्रों को आगे बढा़कर सामाजिक -जातीय और राजनैतिक दल में नेता बनाकर उन्हें लोकसभा, विधान सभा भेजकर अपने समाज -जाति के विकास और अधिकार के लिए अपनी ओर से एक कोशिश करें, चाहे भले ही वह व्यक्ति गरीब हो, लेकिन उनमें अगर समाज के लिए दर्द है और वे समाज के विकास और अधिकार के लिए कुछ करना चाहते हैं तो किसी धनाढ्य उदेश्यहीन व्यक्ति को नेता बनाने से बेहतर है, अपने बीच के गरीब ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ क्रांतिकारी साथियों को नेता बनाने की कोशिश करें। ऐसे लोगों को आगे बढा़ना बहुत आवश्यक और समाज -जाति हित में है, जो अपने लिए नहीं समाज के सर्वागीण विकास की बात करते हैं और समाज के सर्वागीण विकास के लिए धरातल पर कार्य कर रहे हों। तो क्या आप अभी संकल्प ले रहे हैं? 
       आईए! अपने जीवन में इन आवश्यक सामाजिक मुद्दें पर काम करने के लिए अपने कूर्मि कुल गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति राजर्षि शाहूजी महाराज, बलिराजा, राजा कृष्णदेव राय, राजाभोज,सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम लेते हुए संकल्प लेते हैं कि हम अभी से कूर्मि समाज के सर्वागीण विकास के लिए पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ बिना किसी निजी स्वार्थ की आशा किये काम करेंगे।
 
संस्थापक  राष्ट्रीय समता महासंघ, सह राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा