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महात्मा गाँधी की 151वीं जयन्ती पर सीएमएस में वर्चुअल समारोह आयोजित 
October 2, 2020 • Havlesh Kumar Patel • miscellaneous

शि.वा.ब्यूरो, लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने आज राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 151वीं जयन्ती पर बड़े उत्साह व हर्षोल्लास से वर्चुअल गाँधी जयन्ती समारोह मनाया और बड़े ही जोरदार ढंग से बापू की शिक्षाओं व उनके आदर्शों का अलख जगाया। समारोह का शुभारम्भ बतौर मुख्य अतिथि राज्य के श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने वर्चुअल दीप प्रज्वलन से किया। सीएमएस संस्थापक डा. जगदीश गाँधी ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के चित्र पर माल्यार्पण कर बापू के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया। इस अवसर पर सीएमएस के लगभग सभी तीन हजार शिक्षक-शिक्षिकाओं व कार्यकर्ताओं ने सफेद दुग्ध धवल खादी वस्त्रों में ऑनलाइन जुड़कर समारोह की रौनक में चार-चांद लगा दिये। सीएमएस संस्थापक डा. भारती गाँधी, सीएमएस प्रेसीडेन्ट एवं मैनेजिंग-डायरेक्टर प्रो. गीता गाँधी किंगडन, सीएमएस के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफीसर रोशन गाँधी, सीएमएस की सुपीरियर प्रधानाचार्य एवं क्वालिटी अश्योरेन्स एवं इनोवेशन विभाग की हेड सुष्मिता बासु एवं सीएमएस के सभी कैम्पस की प्रधानाचार्यों समेत अनेक गणमान्य हस्तियों ने ऑनलाइन उपस्थिति से समारोह की गरिमा को बढ़ाया।

            इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्य अतिथि स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि सीएमएस राष्ट्रपिता के विचारों को लगातार आगे बढ़ा रहा है और आने वाली पीढ़ियों में अच्छे विचार भर रहा है और यही वक्त की जरूरत है। विश्व एकता, विश्व शान्ति व विश्व बन्धुत्व भारत का मूलमंत्र है और सी.एम.एस. इन्हीं विचारों पर लगातार आगे बढ़ रहा है। इससे पहले गाँधी जयन्ती एवं अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य ऑनलाइन समारोह में सीएमएस शिक्षकों ने विश्व एकता व विश्व शान्ति का संदेश देते अनेक शिक्षात्मक-साँस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर अहिंसा की भावना को सारे विश्व में प्रवाहित प्रचारित किया। समारोह की शुरुआत वन्दे मातरम् एवं स्कूल प्रार्थना की प्रस्तुति से हुई। इसके उपरान्त बापू के जीवन दर्शन पर आधारित लघु फिल्म एवं विश्व संसद के प्रस्तुतीकरण को सभी ने सराहा तथापि विभिन्न शिक्षात्मक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों जैसे सर्व-धर्म एवं विश्व शान्ति प्रार्थना, स्वागत गान ‘आयो रे आयो रे शुभ दिन आयो रे’, गीत ‘मेहनत करने वालों की’, ‘जैसा सोचोगे वैसा बन जाओगे’, कव्वाली ‘भर दे झोली मेरी’ एवं बापू के सुमधुर भजनों के प्रस्तुतीकरण ने अभूतपूर्व समां बाँधा।

            इस अवसर पर डा. जगदीश गाँधी ने कहा कि महात्मा गाँधी के आदर्शो पर चलकर ही समाज में समरसता आयेगी और विश्व एकता की मंजिल मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि महात्मा गाँधी के विचारों के अनुसार विश्व संसद के सपने को साकार किया जाए। प्रो. गीता गाँधी किंगडन ने कहा कि महात्मा गाँधी की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और सदैव रहेंगी। समारोह के अन्त में डा. भारती गाँधी ने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा का आज के परिप्रेक्ष्य में विशेष महत्व है, क्योंकि इसी के माध्यम से भावी पीढ़ी का चरित्र निर्माण संभव है।