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मिसालः पांच वक्त की अदा करते हैं नमाज, मंदिर में सुनाते हैं रामकथा (शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र के वर्ष 12, अंक संख्या-31, 28 फरवरी 2016 में प्रकाशित लेख का पुनः प्रकाशन)
June 18, 2020 • Havlesh Kumar Patel • OLD


शि.वा.ब्यूरो, इलाहाबाद। जब माया मोह में पड़े तुलसी राममय हो गए तो मैं तो अल्लाह का बंदा हूं, राममय क्यों न हो जाता। देश में धार्मिक असहिष्णुता की बढ़ती घटनाओं के बीच रामकथा वाचक मुहम्मद इस्लाम की इन पंक्तियों की गहराई और भी बढ़ जाती है।
विंध्यवासिनी देवी की रूहानी आभा समेटे मिर्जापुर जिले में पहाड़ी ब्लाक स्थित धर्मदेवा गांव के रहने वाले रामकथा वाचक मुहम्मद इस्लाम अक्सर रोजा रखकर भी रामकथा कहते हैं। अभिनेता आमिर खान के बयान के बाद संसद से लेकर सड़क तक जिस असहिष्णुता पर इतना हंगामा मचा हो। देश में माहौल खराब होने की बात हो रही हो, लोग देश छोड़ने तक की बात कर रहे हों, ऐसे ही माहौल में मिर्जापुर के मोहम्मद इस्लाम हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों के लिए सामाजिक सद्भावना का प्रतीक बन कर उभरे हैं।
पिछले 30 साल से मुस्लिम होने के बावजूद इस्लाम रामचरित मानस का पाठ करते हैं। पांचों वक्त के नमाजी इस्लाम के बिना हिन्दू परिवार में रामचरित मानस का पाठ अधूरा सा लगता है. घर में पूजा के समय जो भी परिवार इन्हें बुलाता है पूरी तन्मयता के साथ इस्लाम मानस का पाठ करते हैं। अब तो उन्हें रामचरित मानस का पाठ जुबानी भी याद हो गया है।
मानस का पाठ करते हुए लोग उनके साथ मिलकर कर पाठ करते हैं। इतना ही नहीं इस्लाम को गौ सेवा करना भी पसंद है इसके लिए उन्हों ने घर पर गाय भी रखी है। अब तो इस्लाम इतने प्रसिद्ध हो गए है कि जिले ही नहीं बाहर से भी उन्हें रामचरित मानस के पाठ के लिए बुलावा आता है वह हर जगह पाठ करने जाते हैं।
पूछने पर इस्लाम का कहना है की रामचरित मानस का पाठ वह बचपन से ही करते आ रहे हैं। घर के पास के ही मंदिर में रामचरित मानस का पाठ होता था। वह उसे सुनते थे फिर उसमें षामिल होने लगे। बाद में उन्हें अच्छा लगने लगा तो पाठ करना शुरू कर दिया।
असहिष्णुता पर आमिर खान के बयान पर उनका कहा था की उन्हें कभी भी किसी हिन्दू के घर जाकर बेगाने पन का एहसास नहीं हुआ उन्हें हर जगह प्यार मिला। राम और अल्ला एक ही राम के नाम लेने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस्लाम के रामचरित मानस के पाठ के जूनून को उनके घर वाले भी समर्थन करते हैं। इस्लाम के बड़े लड़के का कहना है उन्हें गर्व होता है की वह उनके पिता है जहा भी जाते हैं। उन्हें इज्जत मिलती है आज लोग धर्म के नाम पर पता नहीं क्यों लड़ते हैं। ऐसे लोगों के लिए उनके पिता प्रेरणा हैं। हिन्दू परिवार के लोगों का कहना है की मुस्लिम होते हुए भी इस्लाम इतनी स्पष्ट शुद्ध रामचरित मानस का पाठ करते हैं कि दूसरा कोई भी नहीं कर सकता।