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पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक की एकता आवश्यक
October 1, 2020 • Havlesh Kumar Patel • social
कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 
बिहार, झारखंड, उडी़सा, यूपी, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली हो या देश के कोई अन्य प्रदेश, जब तक पिछड़े वर्ग के सबसे जागरूक जाति कूर्मि, कुशवाहा, यादव एक होकर, संगठित पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक 85% समाज के अन्य जातियाँ को एक और संगठित नहीं कर लेते हैं, तब तक सत्ता पर कब्जा इन धूर्त, साजिश कर्ता ब्राह्मण  मानसिकता वाली 12 % जातियों का ही रहेगा और यह पक्षपाती वोट देकर सरकारे बनाने वाले 85% पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के मूलनिवासियों के शोषण जैसे सदियों से अब तक किये हैं वैसे आगे भी करते रहेंगे। ब्राह्मणवादी, सामन्तवादी, पक्षपाती मानसिकता के धूर्त सवर्ण जाति के लोग कभी नहीं चाहते हैं कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के सर्वागीण विकास हो पाये।
देश की दोनों राष्ट्रीय राजनीतिक दल -कांग्रेस और भाजपा एक ही मानसिकता की है। ऐसे में किसी गैर कांग्रेस और गैर भाजपा समाजवादी विचार धारा की सरकार केन्द्र और सभी राज्यों में बनाने की बहुत आवश्यकता है, पर 1989 में सक्रिय बीपी सिंह, आईके गुजराल,एचडी देवेगौडा़, चन्द्रशेखर (सभी पूर्व प्रधानमंत्री गैर कांग्रेस गैर भाजपा राजनैतिक दल) शरद यादव, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, नवीन पटनायक, देवी लाल, ओमप्रकाश चौटाला जैसे समाजवादी नेताओं के नेतृत्व वाले जनता दल के बिखंडन के साथ ही यह सपना समाप्त हो चुका है। जिस बीपी सिंह की सरकार ने  पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने के लिए मंडल आयोग की कुछ सिफारिश 27 % आरक्षण देने जैसे क्रांतिकारी फैसले को धरातल पर पहुंचाया, वहीँ जनता दल गैर कांग्रेस गैर भाजपा की सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं। भाजपा ने एक ही कार्यकाल में 4 बार प्रधानमन्त्री बदलने के लिए मजबूर किया और अंत में करीब 7 महीने पहले ही मंडल आयोग की कुछ सिफारिश लागू करने के कारण बीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस लेकर भाजपा ने गिरा दिया था।
आज वही भाजपा नेता नरेन्द्र मोदी खुद को झूठा और नकली ओबीसी बताकर देश के पिछड़े और दलित समाज के वोट के सहारे भारण के प्रधानमंत्री बने हुए हैं और हमारे पिछड़े और दलित समाज के द्वारा वोट से बनी सरकार पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के खिलाफ लगातार जन विरोधी फैसले लेकर हमारे समाज को ठग रहे हैं, पर देश के विभिन्न राजनैतिक दलों के हमारे सभी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के अफसर, नेता और जनप्रतिनिधी मौन धारण करके तमाशा देख रहे हैं। पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के 85 % बहजन समाज के बिखरे और असंगठित रहने के कारण मुट्ठी भर  धूर्त लोग 85 % मूलनिवासी समाज पर शासन कर रहे हैं। यह हमारे पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के नेताओं, अफसरों और आम नागरिक के लिए बहुत ही शर्म की बात है। सन् 1989-90 में हमारे देश के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के 85 % मूलनिवासी समाज को गैर कांग्रेस गैर भाजपा राजनैतिक जनता दल के प्रमुख समाजवादी नेताओं के द्वारा तीसरा विकल्प लाये जाने पर उम्मीद की किरण दिखाई दी थी, पर यह उम्मीद की किरण आपसी विचार धारा के मेल नहीं खाने और निजी स्वार्थ पुरा करने के चक्कर में जनता दल को बिखंडित किये जाने के साथ ही समाप्त हो गया। हमारे समाजवादी नेता कांग्रेस और भाजपा की सामन्तवादी, पक्षपाती और असमानतावादी मानसिकता के धूर्त नेताओं के साजिश का शिकार हो गये, जिसका परिणाम है केन्द्र में आज सरकार द्वारा जो यह निजीकरण और सरकारी क्षेत्रों और विभागों को जो पुंजीपतियों के हाथों बेचें जा रहे हैं, दर असल यह सब आरक्षण समाप्त करने की साजिश ही है। आरक्षण सिर्फ सरकारी सेक्टर में लागू है। जब सरकारी सेक्टर ही नहीं रहेंगे तो आरक्षण तो अपने आप समाप्त हो जाएगा और तब आरक्षण के कारण जो भी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के शिक्षित लोग आगे बढ़ रहे हैं, उन्हें आगे बढ़ने का मौका भी नहीं मिलेगा और तब सदियों पहले जो गुलामी की स्थिति पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज की थी वही स्थिति आने वाले समय में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज की होने वाली है, अगर हमारे पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के नेता और आम नागरिक नहीं चेते तो। इसीलिए सारे आपसी मतभेद और मनभेद, कटुता भूलाकर हम सभी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के 85% मूलनिवासी समाज को एक और संगठित हर हाल में, हर कीमत पर होना होगा । हमें मिलकर सत्ता पर अधिकार करना ही होगा, तभी कुछ सकारात्मक परिणाम पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के विकास और अधिकार के लिए धरातल पर दिखाई देंगे, वरना हमें धूर्त लोगों की गुलामी करने के लिए तैयार रहना चाहिए। 
        आईए! हम सभी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के बीच एकता और संगठन के मजबूती पर अपना ध्यान केन्द्रित करते हैं और पूरी ताकत से, पूरी तैयारी के साथ सत्ता पर अधिकार करते हैं। 
 
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा