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प्रेमचन्द चालीसा के लिए डा. दशरथ मसानिया का आभार, हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक को 21वीं सदी का अभिवादन
July 30, 2020 • Havlesh Kumar Patel • miscellaneous
आलोक कुमार शुक्ल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 
हिंदी गद्य साहित्य का जब भी नाम लिया जाता है तो प्रमुख रूप से प्रेमचंद का नाम अवश्य आता है। युग प्रवर्तक साहित्यकार प्रेमचंद पर बहुत कुछ लिखा गया है और लिखा भी जा रहा है, इस बीच डॉ दशरथ मसानिया ने प्रेमचंद पर चालीसा लिख कर उन्हें एक सच्ची श्रद्धांजलि प्रदान की है । इस चालीसा में प्रेमचंद के जीवन वृत्त का आद्योपांत वर्णन है। जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, शिक्षा-दीक्षा, विवाह आदि घटनाओं का काव्यमय वर्णन हृदयग्राही, सहज-स्मरणीय और प्रभावोत्पादक है। इसके साथ साथ उनकी लिखी महत्वपूर्ण कृतियों, कहानियों, उपन्यासों का भी कवि डॉ मसानिया ने अत्यंत कुशलता पूर्वक सिर्फ नामोल्लेख ही नहीं किया है, बल्कि रचनाओं में किस बारे में लिखा गया है, उसका भी स्पष्ट संकेत किया है, जो आम साहित्य प्रेमी के साथ ही साथ विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा, इसमें कोई संदेह नहीं है। उदाहरण के लिए गोदान उपन्यास की विषय वस्तु क्या है, इसे हम निम्न पंक्तियों में देख सकते हैं-
गोदाना की अमर कहानी ।
सामन्त जाति पूंजीवादी ।।
होरी धनिया बड़े दुखारे ।
सारा जीवन तड़प गुजारे ।।
प्रेमचंद पर पूछे जाने वाले प्रश्नों में से अधिकांश प्रश्नों के उत्तर विद्यार्थी इस चालीसा के ज्ञान के फलस्वरूप आसानी से दे सकेंगे । तथ्यों को याद करने में चालीसा एक सुगम माध्यम है जिसे सहज ही समझा जा सकता है ।
        वस्तुतः कहा जा सकता है कि हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक प्रेमचंद के 140 वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर 'प्रेमचंद चालीसा' की रचना कर डॉ दशरथ मसानिया ने 21वीं सदी में जहां प्रेमचंद को सच्ची काव्य श्रद्धांजलि दी है वहीं सामान्य साहित्यप्रेमी, शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए एक अभिनव नवाचार प्रस्तुत किया है ।
 
कोलकाता ( पश्चिम बंगाल )