ALL social education poem OLD miscellaneous Muzaffarnagar UP National interview Himachal
शादी-ब्याह, शुभकामनाओं से लेकर विभिन्न आंदोलनों का गवाह रहे पोस्टकार्ड का 151 साल का सफर पूरा, 1 अक्टूबर 1869 को ऑस्ट्रिया में जारी हुआ था पहला पोस्टकार्ड
October 1, 2020 • Havlesh Kumar Patel • National

शि.वा.ब्यूरो, वाराणसी। सोशल मीडिया में खोई युवा पीढ़ी का पाला भले ही पोस्टकार्ड से न पड़ा होपर एक दौर में पोस्टकार्ड खत भेजने का प्रमुख जरिया था। शादी-ब्याहशुभकामनाओं से लेकर मौत की ख़बरों तक तो इन पोस्टकार्डों ने सहेजा है। तमाम राजनेताओं से लेकर साहित्यकार व आंदोलनकारियों ने पोस्टकार्ड का बखूबी प्रयोग किया है। अपना वही पोस्टकार्ड 1 अक्टूबर, 2020 को वैश्विक स्तर पर 151 साल का हो गया।  परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि दुनिया में पहला पोस्टकार्ड  एक अक्तूबर 1869 को ऑस्ट्रिया में जारी किया गया था।

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव बताते हैं कि पोस्टकार्ड का विचार सबसे पहले ऑस्ट्रियाई प्रतिनिधि कोल्बेंस्टीनर के दिमाग में आया थाजिन्होंने इसके बारे में वीनर न्योस्टॉ में सैन्य अकादमी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. एमैनुएल हर्मेन को बताया। उन्हें यह विचार काफी आकर्षक लगा और उन्होंने 26 जनवरी 1869 को एक अखबार में इसके बारे में लेख लिखा। ऑस्ट्रिया के डाक मंत्रालय ने इस विचार पर बहुत तेजी से काम किया और पोस्टकार्ड की पहली प्रति एक अक्तूबर 1869 में जारी की गई। यहीं से पोस्टकार्ड के सफर की शुरुआत हुई। दुनिया का यह प्रथम पोस्टकार्ड पीले रंग का था। इसका आकार 122 मिलीमीटर लंबा और 85 मिलीमीटर चौड़ा था। इसके एक तरफ पता लिखने के लिए जगह छोड़ी गई थीजबकि दूसरी तरफ संदेश लिखने के लिए खाली जगह छोड़ी गई। 

कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि भारत में पहला पोस्टकार्ड 1879 में जारी किया गया।  हल्के भूरे रंग में छपे इस पहले पोस्टकार्ड की कीमत 3 पैसे थी और इस कार्ड पर ईस्ट इण्डिया पोस्टकार्ड छपा था। बीच में ग्रेट ब्रिटेन का राजचिह्न मुद्रित था और ऊपर की तरफ दाएं कोने मे लाल-भूरे रंग में छपी ताज पहने साम्राज्ञी विक्टोरिया की मुखाकृति थी। अंदाज़-ए-बयां का यह  माध्यम लोगों को इतना पसंद आया कि साल की पहली तीन तिमाही में ही लगभग 7.5 लाख रुपए के पोस्टकार्ड बेचे गए थे। डाकघरों में मेघदूत, सामान्य, प्रिंटेड और कम्पटीशन, चार तरह के पोस्टकार्ड मिलते रहे हैं। ये क्रमश: 25 पैसे, 50 पैसे, 6 रूपये और 10 रूपये में उपलब्ध हैं। कम्पटीशन पोस्टकार्ड फिलहाल बंद हो गया है।  इन चारों पोस्टकार्ड की लंबाई 14 सेंटीमीटर और चौड़ाई 9 सेंटीमीटर होती है।

पोस्टमास्टर जनरल ने बताया कि कम लिखे को ज़्यादा समझना की तर्ज पर पोस्टकार्ड न सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि तमाम सामाजिक-साहित्यिक-धार्मिक - राजनैतिक आंदोलनों का गवाह रहा है।  पोस्टकार्ड का खुलापन पारदर्शिता का परिचायक है तो इसकी सर्वसुलभता लोकतंत्र को मजबूती देती रही है। आज भी तमाम आंदोलनों का आरम्भ पोस्टकार्ड अभियान से ही होता है। ईमेलएसएमएसफेसबुकटि्वटर और व्हाट्सएप ने संचार की परिभाषा भले ही बदल दी होपर पोस्टकार्ड अभी भी आम आदमी की पहचान है। अकेले वाराणसी में हाल के महीनों में कोरोना संक्रमण के बावजूद अब तक चार हजार से ज्यादा पोस्टकार्डों की डाकघरों द्वारा बिक्री की जा चुकी है।