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श्रीराम काॅलेज ऑफ़ लाॅ व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वाधान में ऑनलाइन विधिक साक्षरता शिविर आयोजित
September 18, 2020 • Havlesh Kumar Patel • Muzaffarnagar

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। आज श्री राम ग्रुप ऑफ़ काॅलिजेज की इकाईं श्रीराम काॅलेज ऑफ़ लाॅ व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वाधान में ऑनलाइन विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया, जिसका विषय भारत में बालिका संरक्षण व कल्याण: विशेषतयाः बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओं अभियान रखा गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिविल जज सलोनी रस्तोगी, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  उपस्थित रहीं। 
लाॅ संकाय की विभागाध्यक्ष पूनम शर्मा ने अतिथि का स्वागत किया व कार्यक्रम के उददेश्य को बताया। उन्होने कहा कि पृथ्वी पर मानव जीवन का अस्तित्व महिलाओं और पुरूषों की समान भागीदारी के बिना असंभव है। हालांकि महिलाओं का अस्तित्व पुरूषों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए मनुष्यों को विलुप्त होने से बचाने के लिए हमें बालिकाओं को बचाने के उपाय करने होंगे। उन्होनें कहा लड़कियों के साथ भेदभाव युगो से चला आ रहा है। आज भी भारतीय समाज के कई वर्ग ऐसे हैं जहाॅ बालिकाओं को बोझ समझा जाता है। विद्यार्थियों में सर्वप्रथम दिव्या संगल ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं अभियान की रूपरेखा व उसके उददेश्य पर प्रकाश डाला। शशांक अग्रवाल ने विषय से सम्बन्धित संविधान के प्रावधान के बारे में बताया। कामाक्षी भारद्वाज ने भारत में बालिकाओं की शिक्षा के बारे में विचार रखे। सुरभि सिंह ने सरकार द्वारा चलाई गयी सुकन्या सृमद्धि योजना के बारे में अपने विचार रखे। अपूर्वा मिततल ने संविधान के प्रावधानों के साथ ही सरकार द्वारा किये गये प्रावधानों के बारे मंे बताया। अंशुल कुमारी ने शिक्षा के साथ-साथ बालिकाओं के सर्वांगीण विकास पर बल देने को बताया। विश्वजीत राणा ने शहरों व गाॅवों मेे बालिकाओं की स्थिति व उनकी शिक्षा पर विचार रखे।


बतौर मुख्य अतिथि सिविल जज सलोनी रस्तोगी ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 1000 लड़कों की तुलना में सिर्फ 918 लड़कियाॅ है। भारत में बालिकाओं की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आज भी अनेक परिवार ऐसे है जहाॅ पुत्र को पुत्री से अधिक महत्व दिया जाता है, पुत्र की लालसा में पुत्री को संसार में आने ही नहीं दिया जाता है। उन्होने महिलाओं व बालिकाओं को समाज में विकृत्त मानसिकता के पुरूषो  का मुकाबला करने के लिए कानून के उपबन्धो के बारे में बताया कि किस प्रकार एक बालिका किसी विकृत्त मानसिकता वाले पुरूष चाहे वह समाज में हो या परिवार में उससे अपनी रक्षा करे, और समाज को भी इस बारे में विचार करना चाहिए और अपनी सोच में बदलाव लाना चाहिए कि वह बालिकाओं का संरक्षण करे। उन्होनें कहा कि बालिकाओं की शिक्षा और उनके उत्थान के लिए समाज के सभी वर्गो को आगे आना चाहिए।
कार्यक्रम के अन्त में श्रीराम काॅलेज ऑफ़ लाॅ के प्राचार्य डाॅ0 रविन्द्र प्रताप सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया। 
संचालन व कार्यक्रम संयोजन प्रवक्ता आंचल अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में  विभागाध्यक्ष पूनम शर्मा के अतिरिक्त, प्रवक्तागण संजीव कुमार, सोनिया गौड, सबिया खान आदि का योगदान रहा।