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शुरुआती 1000 दिन बच्चे के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण, पोषण का रखें ख्याल
September 25, 2020 • Havlesh Kumar Patel • Muzaffarnagar
शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चोपड़ा का कहना है कि बच्चा बार-बार बीमार पड़ जाता है, जल्दी थक जाता है और बातों को समझने में देर लगाता है। तो सतर्क हो जाना चाहिए। इस तरह के लक्षण कुपोषण की गिरफ्त में आने के संकेत हैं। जन्म से लेकर दो साल की आयु तक बच्चे के कुपोषण से ग्रस्त होने की आशंका अधिक होती है। यह बच्चे के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोई पौधा उचित देखभाल, मिट्टी, पानी, ताजा हवा और धूप के बिना विकसित नहीं हो सकता उसी प्रकार एक बच्चा उचित देखभाल और पोषण के बिना स्वस्थ किशोर के रूप में विकसित नहीं हो सकता। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि मुख्यतः पौष्टिक पदार्थ और भोजन में संपूर्ण तत्व नहीं मिल पाने के कारण पूरा पोषण शरीर को नहीं मिल पाता है। इसी वजह से बच्चे और गर्भवती महिलाएं कुपोषण की जद में आ जाती हैं। भोजन में उचित मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और खनिज तत्व नहीं मिलने पर कुपोषण का खतरा पैदा हो जाता है। इसलिए गर्भवती और बच्चों के खान-पान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी वाणी वर्मा का कहना है कि बच्चों के 1000 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं जिसमें से 270 दिन गर्भवस्था और 730 दिन बाल्यावस्था के होते हैं। इस दौरान गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, आयरन की गोली, संतुलित डेढ़ गुना आहार, दो घंटे दिन में आराम जरूरी है, ताकि बच्चा स्वस्थ पैदा हो। बच्चे के पैदा होने के एक घंटे के अंदर उसे स्तनपान, छह माह तक सिर्फ मां का दूध (शहद, पानी, घुट्टी कुछ भी नहीं) सात माह से अर्द्धठोस ऊपरी आहार की शुरुआत एवं दो वर्ष तक लगातार स्तनपान और ऊपरी आहार, नियमित टीकाकरण, प्रत्येक माह बच्चे का वजन, इन सब बातों का ध्यान रख कर बच्चों को कुपोषण से दूर रखा जा सकता है । उन्होंने बताया कुपोषण को मात देने के लिए विभाग द्वारा हर माह पुष्टाहार का वितरण किया जाता है। हर वर्ष सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जाता है। 
कुपोषण की पहचान
शरीर की वृद्धि रुक जाना, मांसपेशियाँ ढीली होना अथवा सिकुड़ जाना, त्वचा का रंग पीला पड़ना, शीघ्र थकान होना, मन में उत्साह का अभाव चिड़चिड़ापन तथा घबराहट होना, बाल रूखे और चमक रहित होना, आँखें धँसना, ऑंखों के चारों ओर काला वृत्त बनाना, शरीर का वजन कम होना तथा कमजोरी, नींद तथा पाचन क्रिया का गड़बड़ होना, हाथ पैर पतले और पेट बढ़ा होना या शरीर में सूजन आना।
कुपोषण से बचाव
प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन युक्त तत्वों को भोजन में शामिल करें। दालें प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत होती हैं। नियमित हरी सब्जियों, दूध और दूध से बने उत्पादों का सेवन करें। कुपोषण के लक्षण दिखने पर तुरंत सरकारी चिकित्सक से परामर्श करें।