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थोड़ा सा
June 25, 2020 • Havlesh Kumar Patel • Himachal
प्रीति शर्मा "असीम", शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
 
आओ! थोड़ा जी लेते हैं।
जीवन विष का प्याला है।
अमृत कर के पी लेते हैं।
 
मौत तो आनी है ,
एक दिन 
उससे पहले, 
आओ थोड़ा जी लेते हैं।
 
कितना खुद को,
मारा पल- पल।
जीवन में सब ,
हारा पल -पल।
जो बचा हुआ है, 
उसको हाथों में भरकर।
 
सारी तमन्नायें पी लेते हैं ।
आओ थोड़ा जी लेते हैं।
 
किसका था इंतजार हमें ।
क्या पाया जीवन का सार ...प्रिय
दिन आते- जाते रहते हैं।
सार्थक भी निरर्थक हो रहते हैं। 
फिर क्यों भागम- भाग .....प्रिय ।
 
हम शून्य हुए जाते हैं।
मर- मर कर जिए जाते हैं। 
आओ थोड़ा सा ,
सच में जी लेते हैं।
जीवन विष को ,
अमृत कर पी लेते हैं।
 
 नालागढ़ हिमाचल प्रदेश
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