गौरव शाली इतिहास का खण्डकाव्य है यशकाव्य

अंजनी कुमार पाल शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। आज भी गड़रिया समाज स्वयं अपने इतिहास के बारे में कम जानता है, कारण यह है कि हमारे महान विभूतियों की जीवनी पर पुस्तकें एवं लेख कम लिखी गई। समाज के बुद्धिजीवी वर्ग लगातार अपने समाज को कुंभकरण की नींद से जगा रहा है और उन्हें शिक्षित कर उनके हिस्सेदारी साझेदारी के लिए निरंतर प्रयासरत है, इसके लिए हमें उन्हें अपना इतिहास बतलाना बहुत ही आवश्यक है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के युवा कवि मनोज पाल अवधवासी ने एक खंडकाव्य की रचना की है, जिसे यसकाव्य का नाम दिया गया है। खंडकाव्य की विशेषता यह है कि यशकाव्य पुण्यश्लोक राजमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवनगाथा एवं होलकर साम्राज्य पर आधारित छंदबद्ध खण्डकाव्य है। इसमें सम्पूर्ण जीवन का संघर्षमयी प्रतिबिंब समाहित है। इस खण्डकाव्य में हिंदी खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है। इसमें शून्य से लेकर शिखर तक जिस प्रकार से श्रीमंत महाराज मल्हार राव जी ने होलकर साम्राज्य को स्थापित किया था, वह पूरे भारतीय समाज के लिये अलौकिक एवं अतुलनीय है। खण्डकाव्य में कवि मनोज पाल अवधवासी ने यह भी दर्शाया है कि महिलाओं को प्राथमिक वरीयता एवं शिक्षा-दीक्षा राज-काज एवं मानव जीवन का वास्तविक रूप का किस तरह खुलकर समर्थन महाराज मल्हार राव होलकर जी ने किया है। अवधवासी ने यह भी दर्शाया है कि पुण्यश्लोक राजमाता अहिल्याबाई होलकर ने जीवन के तमाम-उतार चढ़ाव का किस तरह डटकर सामना किया था। जिस तरह से तीन वर्ष की अवस्था में पिता के निधन के बाद श्रीमंत महाराज मल्हार राव होलकर ने कठिन परिस्तिथियों में भी चुनौतियों का सामना करते हुये स्वयं का उदय किया था। यह खण्डकाव्य पाठकों के लिये प्रेरणादायी सिद्ध होगा। अवधवासी ने बताया कि समीक्षकों ने इस खण्डकाव्य की जमकर प्रशंसा की है। यह खण्डकाव्य सबको पढ़ना चाहिये। इस खण्डकाव्य को पढने से मानव जीवन को बहुत ही प्रेरणा मिलेगी। खासकर मातृशक्ति के लिये यह खण्डकाव्य वरदान सिध्द हो सकता है। इस खण्ड काव्य के प्रमुख समीक्षक डा.जेपी बघेल (मुम्बई), डा.राधेश्याम पाल (बीएचयू) अरविंद पाल फतेहपुर आदि के द्वारा कुशल समीक्षा की गयी है। अयोध्या, उ प्र

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