शि.वा.ब्यूरो, अहमदाबाद। डाक टिकट किसी भी देश की सभ्यता, संस्कृति और विरासत के संवाहक होते हैं। डाक टिकट संग्रह या फिलेटली के क्षेत्र में डाक विभाग द्वारा तमाम नए कदम उठाये जा रहे हैं, इसका उद्देश्य युवाओं में रचनात्मकता के विकास के साथ-साथ यह भी है कि तमाम समसामयिक विषयों, घटनाओं, देश की विभूतियों, जैव विविधता आदि से युवा इन डाक टिकटों के माध्यम से रूबरू हो सकें। फिलेटली का शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने में अहम योगदान है। पोस्टमास्टर जनरल ने भारतीय प्रबंध संस्थान में ओल्ड बिल्डिंग कैंपस में दो दिवसीय डाक टिकट प्रदर्शनी स्टैम्प फिएस्टा-2025 का उद्घाटन करते हुए उक्त विचार व्यक्त किये।
प्रदर्शनी में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी सहित तमाम महापुरुषों, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, हैंडलूम एंड हेरिटेज के आईने में गुजरात की समृद्ध विरासत के साथ-साथ रामायण के विभिन्न पहलुओं पर जारी डाक टिकटों ने लोगों का मन मोहा। इस अवसर पर आईआईएम के विद्यार्थियों ने स्टैम्प फिएस्टा का विजिट करके विभिन्न डाक टिकटों के बारे में जानकारी ली। फिलेटली डिपाजिट एकाउंट, माई स्टैम्प, दीन दयाल स्पर्श छात्रवृत्ति योजना, ढाई आखर पत्र लेखन प्रतियोगिता के बारे में विस्तार से बताया गया। माई स्टैम्प के तहत डाक टिकटों पर अब लोगों की फोटो भी हो सकती है।
पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि डाक टिकट अतीत को वर्तमान से जोड़ते हैं। समाज में नित् हो रहे विकास को डाक टिकटों के आईने में बखूबी देखा जा सकता है। फिलेटली को ष्किंग आफ हॉबी व हॉबी आफ किंगष् के रूप में जाना जाता है, जिसमें रूचि रखने पर विविध विषयों पर डाक टिकटों का संग्रह कर सकते हैं। हर डाक टिकट के पीछे एक कहानी छुपी हुई है और इस कहानी से आज की युवा पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत है। पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि गुजरात की धरती पर जन्मे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने दुनिया को जो राह दिखाई, आज वह मैनेजमेंट के लिए अध्ययन और शोध का विषय बन चुका है। यही कारण है कि दुनिया में सबसे ज्यादा डाक टिकट महात्मा गांधी पर जारी हुए।
पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि संचार के बदलते दौर में आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया को अधिक तरजीह दे रही है, पर युवाओं को फिलेटली से जरूर जुड़ना चाहिए, इससे उनका सामान्य ज्ञान भी खूब विकसित होगा। इसी क्रम में एक अभिनव पहल के तहत डाक विभाग विभिन्न स्कूलों में फिलेटली क्लब खोल रहा है, ताकि विद्यार्थियों में डाक टिकट संग्रह की अभिरुचि के प्रति उनकी प्रवृत्ति को विकसित किया जा सके, इससे विद्यार्थियों की शिक्षा में भी फायदा मिलेगा। डाक-टिकट संग्रह को शिक्षा प्रणाली की मुख्यधारा में लाने और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से डाक विभाग द्वारा कक्षा 6 से 9 तक के बच्चों के लिए 6000 रूपये वार्षिक की दीन दयाल स्पर्श छात्रवृति योजना भी आरम्भ की गई है।
अहमदाबाद सिटी मंडल के प्रवर अधीक्षक डाकघर विकास पालवे ने कहा कि डाक विभाग विभिन्न स्कूलों में फिलेटली क्लब खोल रहा है, ताकि विद्यार्थियों में डाक टिकट संग्रह की अभिरुचि के प्रति उनकी प्रवृत्ति को विकसित किया जा सके। स्टैम्प फिएस्टा जैसी प्रदर्शनियों का उद्देश्य प्रबंधन से जुड़े युवाओं और विद्यार्थियों को डाक टिकटों के विभिन्न पहलुओं से उत्सवी रूप में रूबरू कराना है। आईआईएम दीक्षांत समारोह में आ रहे तमाम विद्यार्थी भी इससे जुड़ सकेंगे।
इस अवसर पर प्रवर अधीक्षक डाकघर विकास पालवे, उपाधीक्षक एसके वर्मा, आईआईएम प्रोफेसर संजय वर्मा, सहायक डाक अधीक्षक अलकेश परमार, हार्दिक राठोड़, एसएन घोरी, फिलेटलिस्ट विजय नवलखा, आईआईएम पोस्टमास्टर कृति मेहता, आईपीपीबी असिस्टेंट मैनेजर मलीहा मिंटो सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।